लुफ्त ज़िन्दगी का...

 ठगने का मज़ा है तो ठगे जाने का मज़ा भी है,

ज़िन्दगी खूबसूरत है, ज़माने का मज़ा भी है,

पहनकर देखना वो कपडे जो अब तंग हो चले,

पुराने कोट में एक नोट मिल जाने का मज़ा भी है,

यूँ तो दौर नहीं अब रूठने का मनाने का,

गर वो रूठे तो फिर मनाने का मजा भी है,

जन्नत क्या है कि इक महफ़िल हो ग़ज़लों से बंधी हुई,

फटी आवाज़ में तबियत से गाने का मज़ा भी है,

तमन्ना जीत जाने की है, दिल में, ज़माने से,

एक बच्चे से मगर हार जाने का मज़ा भी है,

लुफ्त मंज़िल पर भी पहुँचने का उठाएंगे इक दिन,

सफर के मौसमों से दिल लगाने का मज़ा भी है...  - आशु


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