अपनी ही मस्त चाल एक बचपन में होती थी

 अपनी ही मस्त चाल एक बचपन में होती थी,

अब हद से ज़्यादा हम संभल के चलते हैं!

एक दौर था जब छत से बेखौफ कूद जाते थे,

अब गड्ढा भी आता है तो बचकर निकलते हैं! ~आशु

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