आज मेरा भी ईमान सस्ता हो गया होता

 आज मेरा भी ईमान सस्ता हो गया होता,

जो बस इक झूठ कह देता, फ़रिश्ता हो गया होता!

जो बीमार होते थे, तो घर में ही इलाज होता था,
वरना हकीम की बेटी से रिश्ता हो गया होता !
भरी महफ़िल में उसने मुझसे वो सवाल कर लिया,
हंसी में ना उड़ाता तो किस्सा हो गया होता !
वक़्त की नज़ाकत से बदलते रहे हैं लोग,
किसको पता कौन किसका हो गया होता ! ~आशु

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